रामनवमी पूजा या हवन पूजा कैसे करे | Swati Recipe

रामनवमी पूजा या हवन पूजा कैसे करे

By : | 0 Comments | On : September 29, 2017 | Category : Uncategorized

gayatri havan vidhi in Hindi

हमारी भारतीय संस्कृति में हवन को बहुत ही उच्च स्थान दिया गया है. हम कोई भी पूजन करते हैं चाहे वह नवरात्र के नौ दिन हो या फिर सत्यनारायण भगवान की कथा, हवन के बिना यह पूर्ण नहीं होती. हवन को बहुत ही उच्च स्थान दिया गया है. हवन करने से हमारा घर और ऋषि मुनि यह सभी लोग हवन करते थे.

हवन करने से हमारे आसपास की सभी बुराइयों का नाश होता है और चारों ओर शुद्धता फैलती है. जब हम हवन करते हैं तब हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करने के बाद हम अग्नि देवता को देसी घी, फल और अंत में मिष्ठान इन सभी चीजों की आहुति देते हैं अर्थात अग्नि देवता को यह सभी चीजें अर्पित सदियों रते हैं.

यह समय नवरात्रि का अर्थात माता रानी का दिन चल रहा है. जिसमें नवमी के दिन हम सभी लोग अपने-अपने घरों में या फिर दुर्गा जी के पंडाल में या फिर मंदिर में जाकर हवन करते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि हम सही विधि से घर पर हवन को स्वयं ही कैसे संपन्न कर सकते हैं.

 

हवन कैसे करें?

हवन करने के लिए सबसे पहले हमें हवन कुंड जो कि बाजार में मिलता है. उसे खरीद कर लाकर साफ करके सुखा लेना होगा. फिर उसके बाद जिस स्थान पर हवन करना है उस स्थान को धोकर या फिर पोंछ कर साफ कर लें. फिर पूरब दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाये. शुभ कार्यों के लिए हमारे हिंदू धर्म में पूर्व दिशा और उत्तर दिशा को शुभ माना गया है. हवन करने के लिए हमें पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर मुंह कर बैठ जाना होगा.

ध्यान रहे बैठने के लिए हमें किसी चादर या फिर आसान का प्रयोग करना चाहिए. और जहां हम बैठेगें उसके सामने हवन कुंड रखेंगे. फिर उसके बाद हवन कुंड में सबसे पहले आम की लकड़ी को त्रिकोण के आकार में रखेंगे. आम की लकड़ी को इस प्रकार खड़ा करके रखेंगे एक के ऊपर एक त्रिभुज की तरह ताकि इसे आसानी से जलाया जा सके और अग्नि आसानी से और तेजी से प्रज्वलित हो.

हमे पता होना चाहिए की अग्नि जितना ही प्रज्ज्वलित होगी उतनी ही हवन अच्छे से जलेगा और इसे अच्छा भी माना गया है. हवन को प्रज्वलित करने के लिए हम कपूर का प्रयोग कर सकते हैं और अग्नि को तेज़ करने के लिए हम देसी घी की आहुति देते रहेंगे. फिर उसके बाद हवन करने के लिए हवन सामग्री की आवश्यकता होगी. जो कि हम बाजार से हवन सामग्री लाकर रख सकते हैं.

 

अब हम आम की लकड़ी को कपूर की सहायता से प्रज्वलित करेंगे. फिर उसमें हवन सामग्री की आहुति देंगे. आहुति देने के लिए हम अपनी तर्जनी उंगली को छोड़कर बाकी उंगलियों से थोड़ा-थोड़ा हवन सामग्री 108 बार मंत्र उच्चारण के साथ आहुति देंगे. यह मंत्र माताजी का हो सकता है अगर आप नवरात्रि के लिए हवन कर रहे हैं अन्यथा पूजन देवता के अनुसार आप कर सकते है. मन्त्र इस प्रकार हैं “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नम: स्वाहा” कह कर आहुति देंगे. साथ ही बीच बीच में देसी घी से भी आहुति देते रहेंगे.

जब हम 108 बार हवन सामग्री की आहुति दे देंगे. उसके बाद सूखे नारियल को हवन कुंड में आहुति देंगे और फिर उसके बाद एक-एक करके फल जैसे कि केला फिर उसके बाद देसी घी की आहुति देंगे. फिर उसके बाद जो हमने नवैद्य बनाया है (पूरी हलवा या फिर पूरी खीर) उसकी आहुति देंगे. ध्यान रहे यह प्रक्रिया करते वक्त हवन की अग्नि प्रज्वलित होनी चाहिए.  यदि हवन की अग्नि बुझ जाती है तब इसे पहले आप प्रज्वलित करें. फिर उसके बाद ही सारी सामग्री की आहुति देंगे.

अब अंत में पानी की सहायता से आछ्मनी करेंगे. जो कि कम से कम तीन बार होनी चाहिए. आछ्मनी करने के लिए पानी को आम के पत्ते से लेकर तीन बार हवन के ऊपर से घुमा कर बगल में गिरा देंगे. यह प्रक्रिया तीन बार करेंगे उसके बाद हमारी हवन की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है. इसके बाद हम माताजी की आरती कर सकते हैं और हमारा पूजन विधि पूर्वक संपन्न हो जाता है.

जय माता दी!

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